अब तेरी यादों पर भी यकीं नहीं होती
सच है या कोई फरेब यह भी !!

कौन जाने कल क्या होगा

कौन जाने कल क्या होगा,
वो जलेगा या तू दफ़न होगा,
मगर यकीं से कहता हूँ,
शहर को आग लगाने वालो,
बराते मौत में तेरे साथ सोने वाला,
“तेरा आका” न “हमसफ़र” होगा.
— बम्भू

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