आखिर मोदी सरकार ने माना कि बेरोजगारी दर पिछले 45 साल में सब से ज्यादा 2017-18

न्यूज़ एजेंसी ANI ने ट्विट से बता चला की सरकार ने ये माना है की देश में बेरोजगारी बहुत अधिक हो गयी है और यह पीछ 45 सालो में सब से अधिकतम भी है.

यह जानकारी किस ने दि?

सांख्यिकी मंत्रालय के अन्तर्गतय आता है NSSO. देश में जो भी सरकारी सर्वे होते हैं, जो भी आंकड़े जुटाए जाते हैं वो NSSO के द्वारा ही किये जाते है.

NSSO ने कब दिया डेटा और तब क्या बोले नेता?

NSSO यानि National Sample Survey Office report के द्वारा पिछले दिसंबर में ही सरकार को देफिय गया था पर तब सरकार ने इसे  जारी नहीं किया था.

 उस समय केन्द्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा था- पिछले पांच वर्ष में कोई बड़ा सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन ना होना, इस बात की ओर इशारा करता है कि सरकार की योजनाओं से रोजगार का सृजन हुआ है

दिसंबर में हुआ क्या था?

दरअसल दिसम्बर में कुछ नहीं हुआ बस हुए ये की NSSO रिपोर्ट सरकार को सौंप दि और सरकार ने इसे दबा दिया पर बात कही से लिक हो गयी. 1 जनवरी 2919 के एक इंग्लिश अखबार में एक खबर छपी, खबर में NSSO के हवाले से दावा किया गया की देश में बेरोजगारी का दर पिछले 45 साल में सब ज्यादा है. अख़बार ने आंकड़ो के हवाले से बताया की इससे पाहे 1972-73 में बेरोजगारी का दर इस ऊंचाई तक पहुची थी.

उस समय सरकार ने क्यों नहीं जारी किया था डेटा?

TheLallantop वेबसाइट के डेविड लिखते है-

लोकसभा चुनाव सिर पर थे. बेरोजगारी के मुद्दे पर विपक्ष सरकार को घेर रहा था. विपक्ष आरोप लगाता रहा कि नोटबंदी के बाद बेरोजगारी बढ़ी है. लाखों-करोड़ों लोगों की जॉब चली गई. सरकार की यह रिपोर्ट विपक्ष के आरोपों को सही साबित कर रही थी. ऐसे में सरकार अपने ही संगठन की वैध रिपोर्ट कैसे जारी कर देती. इस रिपोर्ट के आने के बाद ये साफ़ हो जाता कि सरकार के फ़ैसले गलत थे. 

अब जब लोकसभा चुनाव खत्म हो चुके हैं. मोदी सरकार पूर्ण बहुमत के साथ फिर से सत्ता में आ गई है. विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस के पास इतनी भी सीटें नहीं हैं कि वह मुख्य विपक्ष के नेता का तमगा पा सके. सरकार ने ये डाटा जारी किए हैं. मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना होगा.

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