क्या आप को पता है केदारनाथ के पिट्ठू के बारे में? Twitter Se

दरअसल केदारनाथ धाम यात्रा के लिए अगर आप कभी गये है तो आप ने यह जरूर देखा होगा कि वहाँ जो लोग खुद चलकर ऊपर नहीं जा सकते है या नहीं जाना चाहते हैं उन्हें ऊपर तक ले जाने के लिए पिट्ठू, यानी वो इंसान जो इंसान या सामान को अपने पीठ पर लाद कर ले जाता है, किराये पर उपलब्ध हैं।

इसके कई कारण है और अलग अलग लोगों द्वारा इसके अलग अलग कारण दिए जा सकते है, जिनमे से कई काफी बुनियादी जान पड़ती है। जैसे पिट्ठुओं के लिए यह एक मात्र(एक हद तक सही) कमाने का साधन होता है। वहीं कुछ लोग ये भी कहते हैं कि यह देख कर कलेजा फट जाता है कि कोई इंसान अपने से लगभग2 गुणा वजन वाले इंसान को अपने पीठ पर लाद कर इतनी कठिन चढ़ाई चढ़ता है जो सरकार के लिए सही नहीं है।

कुछ लोगों की बात आप के लिए

Deeply dismayed to see the inhuman practice of many people being carried by Humans (Pitthhus) on the Kedarnath trek. It’s so difficult to climb up, cant imagine the pain of the pitthu who is often carrying double his weight. Srsly better facilities should b provided by the Govt!

सविता मालवीय

मयूर सेजपाल कह रहे है कि अगर सरकार ने रोड बनाये तो वायु प्रदूषण होगी और इससे केदारनाथ का वातावरण प्रभावित होगा और इससे पिट्ठू समाज में बेरोजगारी होगी।वहीं मयूर मानते हैं कि यह कठिन काम है लेकिन ये लोग अभ्यस्त हो चुके हैं।

वहीं कुछ लोग थोड़ा आगे निकल जाते हैं-

राणा अयूब अपनी भावनाओं में बह जाते है, और देश के उन नेताओं पर कटाक्ष करते हैं जो अपने आप को दिखाने या शक्तिशाली साबित करने के लिए लाखों रुपये पानी में बहा देते हैं।

कुछ लोग इन बातो से बहुत आगे निकल जाते हैं, जिसे देखकर, पढ़ कर या सुन कर आप चक्कर खा सकते हैं-

खैर पिट्ठुओं के बारे में आप क्या सोचते हैं हमे कमेंट कर के बता सकते हैं।

-बम्भू कुमार, ब्लॉगर

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